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राहु को प्रसन्न करने के उपाय

 अक्सर लोग राहु या केतु से डरे रहते हैं। राहु और केतु के कारण ही कालसर्प दोष निर्मित होता है। पुराणों अनुसार पितृदोष या प्रारब्ध के कारण कालसर्प योग बनता है। कालसर्प योग भी मुख्यत: 12 तरह के माने गए हैं। बहुत से लोग कालसर्प योग से डरे हुए हैं, लेकिन जंगल के खतरनाक जानवरों के बारे में जो जानते हैं वे निश्चित ही बच निकलने का रास्ता भी ढूंढ ही लेते हैं।

हम आपको राहु और केतु के चमत्कारिक अचूक उपाय बताएंगे आपकी कुंडली के खाने अनुसार। आप अपनी कुंडली में देखें की राहु और केतु किस खाने में बैठे हैं। उसी खाने के उपाय करके आप इन दोनों ग्रहों के बुरे प्रभावों से मुक्त हो सकते हैं। इससे पहले आप जान लें कि राहु और केतु आपके जीवन में किस तरह का प्रभाव डालते हैं।

यदि अचानक शरीर अकड़ने लगे या दिमाग अनावश्यक तनाव से घिर जाए और चारों तरफ अशांति ही नजर आने लगे, घबराहट जैसा होने लगे तो इन सभी का कारण भी राहु है। वैराग्य भाव या मानसिक विक्षिप्तता भी राहु के कारण ही जन्म लेते हैं। बेकार के दुश्मन पैदा होना, बेईमान या धोखेबाज बन जाना, मद्यपान करना, अति संभोग करना या सिर में चोट लग जाना यह सभी राहु के अशुभ होने की निशानी है। ऐसे व्यक्ति की तरक्की की शर्त नहीं।

 

सकारात्मक प्रभाव : व्यक्ति दौलतमंद होगा। कल्पना शक्ति तेज होगी। राहु के अच्छा होने से व्यक्ति में श्रेष्ठ साहित्यकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक या फिर रहस्यमय विद्याओं के गुणों का विकास होता है। इसका दूसरा पक्ष यह कि इसके अच्छा होने से राजयोग भी फलित हो सकता है। आमतौर पर पुलिस या प्रशासन में इसके लोग ज्यादा होते हैं।

राहु का एक उपाय कर देगा सारे काम आसान

राहु को अनुकूल बनाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं करना होता केवल मात्र भगवान भैरव अथवा शिव को प्रसन्न करना होता है। एक बार ये देवता प्रसन्न हो गए तो फिर व्यक्ति की हर मनोवांछित इच्छा रातों-रात पूरी होती चली जाती है। उसके सब दुश्मन स्वतः ही नष्ट होने लगते हैं और वो दिन-दूना रात-चौगुना तरक्की करने लगता है।

ऐसे करें भगवान भैरव की पूजा

पूजा रविवार के दिन से आरंभ करें। भगवान भैरव को चोला चढ़ाकर लाल चंदन, इत्र, गुलाब के फूल, जनेऊ, नारियल, मिठाई आदि अर्पित करें। इसके बाद उनसे सभी भूलों के लिए हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें और भैरव गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। इस जप के बाद भगवान से अपने समस्त कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें। पूजा के बाद पक्षियों को दाना तथा चींटियों व अन्य पशुओं को खाने के लिए कुछ न कुछ अवश्य दें। कुछ ही दिनों में आपकी इच्छा पूर्ण हो जाएगी। मंत्र निम्न प्रकार है-

ॐ शिवगणाय विद्महे। गौरीसुताय धीमहि। तन्नो भैरव प्रचोदयात।।


पं दीपक तिवारी

8318354315

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