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Showing posts from March, 2023

मन को शांत करने के उपाय

  मन में हमेशा आपके जीवन से संबंधित बातें चलती रहती हैं। लेकिन शायद आप यह बात नहीं जानते कि मन व दिमाग हमेशा अशांत रहने से आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। जब तक कोई अपने मन को शांत करना न सीख ले तब तक वह कुछ और सही से नहीं सीख सकता है।  जिन्दगी में मन और दिमाग का अशांत रहना एक आम बात है। मन को शांत करना नामुमकिन तो नहीं होता है लेकिन मन को शांत करने के लिए टिप्स और उपाय को सही तरीके से इस्तेमाल करना जरुरी होता है। जब तक कोई अपने मन को शांत करना न सीख ले तब तक वह कुछ और सही से नहीं सीख सकता है। मन अशांत रहने के कारण हम कई बार बड़े फैसले नहीं ले पाते हैं और छोटी-छोटी बातों में गलतियां करते हैं। हमारा दिमाग हमारा मन उस तरफ आकर्षित रहता है जहां हम नहीं सोचना चाहते। इन्हीं गलतियों से बचने और मन को शांत करने में मन को शांत करने के उपाय काफी लाभकारी हो सकते हैं मन को शांत करने के उपाय योगा करें : अपने मन को शांत करने का सबसे अच्छा उपाय है कि योगा किया जाए। योगा करने से दिमाग और मन दोनों ही शांत होते है। योगा का मुख्य फायदा होता है मन को शांत करना है। योगा की मदद से काफी कम समय में ...

घर की कलह दूर करने के उपाय

  मनुष्य के जीवन में सुख शांति होना अत्यंत आवश्यक है. इसकी कमी व्यक्ति की सेहत, तरक्की और अन्य चीजों को भी प्रभावित करती है. घर में लड़ाई-झगड़ा वास्तु दोष के कारण भी होता है. जिसके निवारण के लिए कई उपाय वास्तु शास्त्र में बताए गए हैं  हर कोई चाहता है कि उसके घर में खुशहाली और समृद्धि हमेशा बनी रहे और इसके लिए घर का वास्तु सही होना बहुत जरूरी है. इसलिए हमेशा नया घर बनवाते समय वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखना अति आवश्यक होता है. घर का वास्तु सही नहीं होने के कारण घर में गृह कलह, लड़ाई-झगड़े लगातार बढ़ते चले जाते हैं. इसके अलावा घर के सदस्यों की सेहत पर भी इसका बुरा असर होता है. कई बार घर में बिना बात के भी कलह, लड़ाई-झगड़े या क्लेश होते रहते हैं। इनके लिए ग्रह दोष या वास्तु दोष जैसी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।वैसे तो कभी कभार झगड़ा हो जाना कोई नई बात नहीं है। कहा गया है कि जहां चार बर्तन होते हैं वहां खटपट की आवाज तो आती ही है। पर हर रोज घर में लड़ाई-झगड़े और क्लेश हो तो इंसान परेशान हो ही जाता है। ऐसे हालात में आप ये उपाय कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र में नमक के उपाय का बड़...

राहु को प्रसन्न करने के उपाय

 अक्सर लोग राहु या केतु से डरे रहते हैं। राहु और केतु के कारण ही कालसर्प दोष निर्मित होता है। पुराणों अनुसार पितृदोष या प्रारब्ध के कारण कालसर्प योग बनता है। कालसर्प योग भी मुख्यत: 12 तरह के माने गए हैं। बहुत से लोग कालसर्प योग से डरे हुए हैं, लेकिन जंगल के खतरनाक जानवरों के बारे में जो जानते हैं वे निश्चित ही बच निकलने का रास्ता भी ढूंढ ही लेते हैं। हम आपको राहु और केतु के चमत्कारिक अचूक उपाय बताएंगे आपकी कुंडली के खाने अनुसार। आप अपनी कुंडली में देखें की राहु और केतु किस खाने में बैठे हैं। उसी खाने के उपाय करके आप इन दोनों ग्रहों के बुरे प्रभावों से मुक्त हो सकते हैं। इससे पहले आप जान लें कि राहु और केतु आपके जीवन में किस तरह का प्रभाव डालते हैं। यदि अचानक शरीर अकड़ने लगे या दिमाग अनावश्यक तनाव से घिर जाए और चारों तरफ अशांति ही नजर आने लगे, घबराहट जैसा होने लगे तो इन सभी का कारण भी राहु है। वैराग्य भाव या मानसिक विक्षिप्तता भी राहु के कारण ही जन्म लेते हैं। बेकार के दुश्मन पैदा होना, बेईमान या धोखेबाज बन जाना, मद्यपान करना, अति संभोग करना या सिर में चोट लग जाना यह सभी राहु के अशु...

मंगल को मजबूत या प्रसन्न करने के उपाय

 1. मंगल ग्रह का जप मंत्र- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:'   2. मंगल ग्रह का वैदिक मंत्र- ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अय्यम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।   3. मंगल ग्रह का तांत्रिक मंत्र : ॐ अंगारकाय नम:।    4. मंगल ग्रह का गायत्री मंत्र : ॐ अंगारकाय विद्यहे शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो भौम: प्रचोदयात्।   5. मंगल ग्रह का पूजा मंत्र : ॐ भोम भोमाय नम:।    मंगल स्तुति- (Mangal grah ki stuti) : जय जय जय मंगल सुखदाता। लोहित भौमादित विख्याता।। अंगारक कुज रूज ऋणहारी। दया करहु यहि विनय हमारी।। हे महिसुत दितीसुत सुखरासी। लोहितांग जग जन अघनासी।। अगम अमंगल मम हर लीजै। सकल मनोरथ पूरण कीजै।। पं दीपक तिवारी 8318354315

चंद्रमा को उच्च करने के उपाय

 चंद्रमा के 11 सरल उपाय * शिव की भक्ति।    * सोमवार का व्रत।   * मोती धारण करना।   * प्रतिदिन माता के पैर छूना।   * पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें।   * चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती दान करना चाहिए।   * दो मोती या दो चांदी के टुकड़े लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें।   * कुंडली के छठे भाव में चन्द्र हो तो दूध या पानी का दान करना मना है।   * यदि चन्द्र 12वां हो तो धर्मात्मा या साधु को भोजन न कराएं और न ही दूध पिलाएं।   * सोमवार को सफेद वस्तु जैसे दही, चीनी, चावल, सफेद वस्त्र,1 जोड़ा जनेऊ, दक्षिणा के साथ दान करना।    * 'ॐ सोम सोमाय नमः' का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है। पं दीपक तिवारी 8318354315

कुंडली विवरण

क्या बताते हैं कुंडली के 12 भाव जन्मकुंडली में बारह भावों की रचना पं दीपक तिवारी  ज्योतिष में मान्य बारह राशियों के आधार पर जन्मकुंडली में बारह भावों की रचना की गई है। प्रत्येक भाव में मनुष्य जीवन की विविध अव्यवस्थाओं, विविध घटनाओं को दर्शाता है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानें। 1. प्रथम भाव : यह लग्न भी कहलाता है। इस स्थान से व्यक्ति की शरीर यष्टि, वात-पित्त-कफ प्रकृति, त्वचा का रंग, यश-अपयश, पूर्वज, सुख-दुख, आत्मविश्वास, अहंकार, मानसिकता आदि को जाना जाता है। 2. द्वितीय भाव : इसे धन भाव भी कहते हैं। इससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, परिवार का सुख, घर की स्थिति, दाईं आँख, वाणी, जीभ, खाना-पीना, प्रारंभिक शिक्षा, संपत्ति आदि के बारे में जाना जाता हैं। 3. तृतीय भाव : इसे पराक्रम का सहज भाव भी कहते हैं। इससे जातक के बल, छोटे भाई-बहन, नौकर-चाकर, पराक्रम, धैर्य, कंठ-फेफड़े, श्रवण स्थान, कंधे-हाथ आदि का विचार किया जाता है। 4. चतुर्थ स्थान : इसे मातृ स्थान भी कहते हैं। इससे मातृसुख, गृह सौख्‍य, वाहन सौख्‍य, बाग-बगीचा, जमीन-जायदाद, मित्र छाती पेट के रोग, मानसिक स्थिति आदि का विचार किया जाता...